एग्रीमेंट टू सेल और सेल डीड में क्या फर्क है?
दोनों दस्तावेज़ों की कानूनी अहमियत और फर्क समझें
प्रॉपर्टी की डील में अक्सर दो अलग-अलग दस्तावेज़ आते हैं — एग्रीमेंट टू सेल और सेल डीड। दोनों को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, पर कानूनी तौर पर इनमें बड़ा फर्क है, जिसे समझना बहुत ज़रूरी है।
एग्रीमेंट टू सेल बनाम सेल डीड
| एग्रीमेंट टू सेल | भविष्य में बेचने का वादा — मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं होता |
| सेल डीड (रजिस्ट्री) | अंतिम, रजिस्टर्ड दस्तावेज़ — मालिकाना हक पूरी तरह ट्रांसफर होता है |
व्यवहार में, एग्रीमेंट टू सेल के बाद ही सेल डीड बनाई और रजिस्टर की जाती है — पर सिर्फ एग्रीमेंट टू सेल होने पर कानूनी मालिकाना हक नहीं मिलता।